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बंगाल में EVM को लेकर बवाल पर चुनाव आयोग ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, इधर हाई कोर्ट ने भी दिया TMC को झटका

 Published : Apr 30, 2026 11:31 pm IST,  Updated : Apr 30, 2026 11:46 pm IST

गुरुवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने चौरंगी इलाके में स्ट्रॉग रूम के बाहर जमकर हंगामा किया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया है कि स्ट्रॉग रूम के भीतर कुछ लोग घुसे हैं और काउंटिंग से पहले गड़बड़ी की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।

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कोलकाता में भारी बवाल। Image Source : PTI/ANI

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले गुरुवार को EVM की सुरक्षा को लेकर बवाल देखने को मिला। कोलकाता में EVM स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर TMC ने धरना दिया और आरोप लगाए कि EVM से छेड़छाड़ हुई है। TMC नेता कुणाल घोष और शशि पांजा ने करीब 4 घंटे तक स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर EVM में छेड़छाड़ को लेकर धरना दिया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया है कि स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर कुछ लोग घुसे हैं, काउंटिंग से पहले गड़बड़ी की कोशिश हो रही है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से जवाब मिलने के बाद उन्होंने अपना धरना खत्म कर दिया। अब इस पूरे हंगामे को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जानकारी दी है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उन्होने बताया है कि पोस्टल बैलेट के लिए अलग स्ट्रांग रूम है। EVM वाले स्ट्रांग रूम सील और सुरक्षित हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया है कि पोलिंग एजेंट्स और पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम सील किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। हमने सभी दलों के एजेंट्स को सूचना दी थी। मनोज अग्रवाल ने बताया कि स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित है। ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में गड़बड़ी का कोई स्कोप नहीं है। कोई बाहरी इंसान स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर नहीं गया है।

हाई कोर्ट से TMC को झटका

दूसरी ओर कलकत्ता हाई कोर्ट ने काउंटिंग को लेकर TMC की मांगों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सेंट्रल गवर्नमेंट/PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर/असिस्टेंट बनाने के फैसले की वैधता को बरकरार रखा। रिट याचिका खारिज कर दी गई। कोर्ट के फैसले के अनुसार:

  • काउंटिंग प्रोसेस में कोई दखल नहीं।
  • ऐसी नियुक्ति ECI के अधिकार क्षेत्र में है और गैर-कानूनी नहीं है।
  • हैंडबुक के नियम सिर्फ राज्य कर्मचारियों के चयन को सीमित नहीं करते हैं।
  • माइक्रो ऑब्जर्वर, एजेंट, CCTV वगैरह की मौजूदगी पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, जिससे आरोप अटकलें बन जाते हैं।
  • एडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (ACEO) के पास डेलीगेशन प्रोविजन (RP एक्ट) के तहत वैध अधिकार हैं।
  • इसलिए, विवादित कम्युनिकेशन अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है।
  • कोर्ट ने इस आशंका को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार के कर्मचारी राजनीतिक प्रभाव में काम करेंगे क्योंकि:
  • काउंटिंग हॉल में कई स्टेकहोल्डर मौजूद होते हैं।
  • CCTV और ऑब्जर्वर जैसे सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।
  • आरोप बिना सबूत के सिर्फ आशंकाएं थीं।
  • चल रही चुनाव प्रक्रिया के दौरान दखलंदाजी को मना किया जाता है।
  • कोई भी शिकायत चुनाव पिटीशन (सेक्शन 100, RP एक्ट, 1951) के जरिए उठाई जा सकती है।

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